बहुत ज्यादा नर्वस या एक्साइटेड होने पर इंसान की हार्ट बीट का कम-ज्यादा होना सामान्य सी बात है लेकिन अगर आपकी हार्ट बीट कुछ सेकेंड से ज्यादा देर के लिए अनियंत्रित हो रही है तो ये बड़ी दिक्कत खड़ी कर सकता है. इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. जबड़े, दांत या सिर में दर्द - हार्ट अटैक से पहले कई रोगियों ने हाथ, जबड़े, दांत या सिर में दर्द की शिकायत की है. अगर आपको भी इस तरह की समस्या हो रही है तो जल्द से जल्द जांच करा लें. कंधों में दर्द - हाथ के अलावा अगर लगातार आपके कंधों में या कमर में दर्द होता है तो सावधान हो जाएं. हार्ट अटैक आने से पहले कई रोगियों में यह लक्षण दिखाई देते हैं. लगातार खांसी - लगातार होने वाली खांसी को हार्ट अटैक या दिल से जुड़ी बीमारियों से जोड़ना सही नहीं है . लेकिन अगर आप किसी हार्ट डिसीज से जूझ रहे हैं तो लगातार होने वाली खांसी पर ध्यान देने की जरूरत है. एक्सपर्ट कहते हैं कि खांसते वक्त अगर सफेद या गुलाबी रंग का बलगम निकल रहा है तो ये हार्ट फेलियर का संकेत हो सकता है. सीने में जलन - अगर आपके ...
जन्म कुंडली के त्रिकोण भावों में से किसी एक भाव पर पितृ कारक ग्रह सूर्य की राहु अथवा शनि के साथ युति हो तो जातक को पितृ दोष होता है। राहु और शनि कुंडली के किसी भाव में विराजमान हो तो पितृ दोष होता है। लग्न तथा चन्द्र कुंडली में नवां भाव या नवमेश अगर राहु या केतु से ग्रसित हो तो। जन्म कुंडली में लग्नेश यदि त्रिक भाव (6,8 या 12) में स्थित हो तथा राहु लग्न भाव में हो तब भी पितृदोष होता है। अष्टमेश का लग्नेश, पंचमेश अथवा नवमेश के साथ स्थान परिवर्तन योग भी पितृ दोष का निर्माण करता है। दशम भाव को भी पिता का घर माना गया है अतः दशमेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो इसका राहु से दृष्टि या योग आदि का संबंध हो तो भी पितृदोष होता है। यदि आठवें या बारहवें भाव में गुरु-राहु का योग और पंचम भाव में सूर्य-शनि या मंगल आदि कू्र ग्रहों की स्थिति हो तो पितृ दोष के कारण संतान कष्ट या संतान सुख में कमी रहती है। अगर कुंडली में पितृ कारक ग्रह सूर्य अथवा रक्त कारक ग्रह मंगल इन दोनों में से कोई भी नवम भाव में नीच का होकर बैठा हो और उस पर राहु/केतु की दृष्टि हो तो पितृ दोष का निर्माण हो जाता है। यदि कुंडली ...
आप सभी धर्म प्रेमियों को सादर प्रणाम आप सभी को अवगत कराना चाहूंगा कि दिनांक 10 जुलाई 2022 दिन रविवार को देव शयनी एकादशी का उपवास रखा जाएगा। देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास प्रारंभ। देव शयनी एकादशी पर रवि योग भी बन रहा है। हिंदू धर्म में चातुरमास का विशेष महत्व है आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा में चले जाते हैं। 4 माह तक प्रकृति का संचालन भगवान भोलेनाथ करते हैं। चातुर्मास में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवप्रबोधनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जागते हैं। और सभी मांगलिक कार्य पुनः प्रारम्भ हो जाते है। देवशयनी एकादशी को तुलसी पौध रोपण भी किया जाता है। ( इस बार रविवार को एकादशी होने के कारण कई लोगों की मन में भ्रम की स्थिति है कि तुलसी रोपण होगा कि नहीं रविवार को तुलसी रोपण किया जाएगा। रविवार को केवल तुलसी के पत्ते तोड़ना व जल अर्पित करना वर्जित होता है धार्मिक मान्यतानुसार रविवार के दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। तुलसी में जल चढ़ाने से माता तुल...
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