त्योहारों में रोशनी खरीदें तो वोल्टेज जरूर चेक करें
त्योहारों में रोशनी खरीदें तो वोल्टेज जरूर चेक करें। क्योंकि चीनी झालर में क्षमता से आधी ही रोशनी मिलती है जबकि बिजली की खपत पूरी होती है। इतना ही नहीं यूज एडं थ्रू चीनी आइटम से भारी मात्रा में ई-वेस्ट भी जनरेट हो रहा है जिसका डिसमेंटल तक नहीं हो रहा। चीन के भारत विरोधी रुख को देखकर अब शहर के व्यापारी और आमजन चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने लगे हैं। शुरुआत महिलाओं ने चीनी उत्पादों की होली जलाकर की।
खपत पूरी रोशनी आधी
चीन मेड झालर कितने वॉट की है यह स्पष्ट नहीं होता। इलेक्टिकल्स व्यापारी संजय गंगवानी के मुताबिक चाइनीज झालर 50-60 वॉट की आमतौर पर होती है। उसमें बिजली खपत भी पूरी होती है, लेकिन झालर की रोशनी उतनी नहीं होती। जबकि अच्छी गुणवत्ता वाली झालर में ऐसा नहीं होता। उसकी कीमत जरुर ज्यादा होती है, लेकिन टिकाऊ और रोशनी भी ज्यादा होती है।
सस्ता तो है नुकसान भी
– गारंटी-वारंटी नहीं। खरीदने के बाद खराब हो जाए तो वापसी नहीं।
– खराब होते ही सुधार नहीं सकते। फेंकना मजबूरी।
– कम कीमत के उत्पादन में उपयोग प्लास्टिक, रबर की गुणवत्ता कमजोर।
– कचरा ई-वेस्ट होता है जो घर के बाहर फेंकते हैं इससे पर्यावरण को नुकसान।
व्यापारियों ने कहा-मेक इन जबलपुर भी
चीन को टक्कर देने जबलपुर के व्यापारी भी सामने आए हैं। मेक इन जबलपुर में स्वदेशी झालर बनना शुरू हो गई है। दीपावली के लिए शहर की कई दुकानों में ऐसी झालर बिकने भी आ गईं है। व्यापारी प्रवीण गुलाटी के मुताबिक जबलपुर में कई जगह स्वदेशी झालर बिक रही हैं जो थोड़ी कीमत में ज्यादा हैं, लेकिन टिकाऊ हैं।
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