भगवान शिव ने यहां काटा था गणेश जी का सिर
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हिन्दू धर्म
हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं का जिक्र मिलता है, हालांकि ये संख्या हमेशा से ही विवादास्पद रही है लेकिन सामान्य जन की बात करें तो वह यही जानता है कि हिन्दू धर्म और 33 करोड़ संख्या का संबंध अवश्य मौजूद है।
देवी-देवताओं की संस्ख्या
भले ही देवी-देवताओं की संस्ख्या बहुत ज्यादा हो लेकिन सच यही है कि सभी को एक अलग और विशिष्ट स्थान प्रदान किया गया है। जैसे देवी लक्ष्मी को धन की देवी माना गया है, भगवान शिव को तंत्र का देवता, भगवान कृष्ण का संबंध उल्लास से है तो देवी सरस्वती को विद्या की देवी कहा गया है।
शुभ और लाभ
ऐसे ही भगवान गणेश को शुभ और लाभ का देवता माना गया है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है, किसी भी कार्य से पहले इनकी पूजा करना इसलिए अवश्यक माना जाता है क्योंकि ऐसा करने से उस कार्य में कोई भी विघ्न बाधा नहीं आती।
माता पार्वती
तस्वीरों और कहानियों में गणेश जी को हाथी के मुख और मनुष्य के शरीर के साथ दर्शाया गया है। जिनका जन्म उनकी माता पार्वती के शरीर की मैल से हुआ है। कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश की का सिर काट डाला था और माता पार्वती के कहने पर उन्हें हाथी का सिर लगा दिया था।
अन्य कहानियां
खैर उनके जन्म से जुड़ी कई अन्य कहानियां भी हैं इसलिए किसी एक पर पुख्ता तौर पर विश्वास नहीं किया जा सकता।
पौराणिक
भारत में कई ऐसी जगहें हैं जिनका संबंध पौराणिक कहानियों के साथ माना जाता है। ऐसे ही एक स्थान से आज हम आपका परिचय करवाने जा रहे हैं।
उत्तराखंड
उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों के बीच घिरी पाताल भुवनेश्वर गुफा वो स्थान है जहां माना जाता है कि गणेश जी का कटा हुआ सिर वहीं गिरा था। यह गुफा विशालकाय पहाड़ के 90 फीट भीतर स्थित है।
भुवनेश्वर गुफा
पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) में स्थित पाताल भुवनेश्वर नामक गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है, लेजिन अब यह भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र भी बन गई है क्योंकि।
भगवान गणेश का कटा सिर
इस गुफा में शिला के रूप में भगवान गणेश का कटा सिर रखा है और उसके ठेक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला शवाष्टक दम ब्रह्मकमल मौजूद है जिसमें से टपकती बूंदें भगवान गणेश के मस्तक का अभिषेक करती हैं।
ब्रह्मकमल
ब्रह्मकमल बहुत अद्भुत है, ऐसा माना जाता है कि पौराणिक समय में स्वयं भगवान शिव ने इस कमल को स्थापित किया था।
कलियुग
भुवनेश्वर की गुफाओं को प्रत्येक युग का प्रतीक माना गया है। इसका एक पत्थर कलियुग का भे प्रतीक है जो धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठ रहा है। स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता है कि जिस दिन यह पत्थर दीवार से टकरा जाएगा उस दिन कलियुग का अंत हो जाएगा।
कालभैरव
इस गुफा से केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ की गुफाओं के दर्शन भी होते हैं। इन गुफाओं की चट्टान पर तक्षक नाग की आकृति जैसी भी बनी दिखाई देती है। कालभैरव की जिह्वा के दर्शन भी आप यहां कर सकते हैं।
मोक्ष की प्राप्ति
इन गुफाओं के विषय में यह मान्यता है कि जो भी व्यक्ति कालभैरव के मुंह से होकर सीधे गर्भगृह में प्रवेश कर पूंछ के हिस्से तक पहुंचता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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